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Journal of Frontiers in Multidisciplinary Research

ISSN: 3050-9718 (Print) | 3050-9726 (Online) | Impact Factor: 8.10 | Open Access

‘नमक का दरोगा’, ‘पंच परमेश्वर’ और ‘ईदगाह’ में नैतिक आदर्शों का तुलनात्मक विश्लेषण

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Abstract

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे युगप्रवर्तक कथाकार हैं जिन्होंने अपने कथा साहित्य के माध्यम से भारतीय समाज के यथार्थ, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। प्रस्तुत शोध-पत्र में प्रेमचंद की तीन प्रसिद्ध कहानियों—‘नमक का दरोगा’, ‘पंच परमेश्वर’ और ‘ईदगाह’—में निहित नैतिक आदर्शों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इन कहानियों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि प्रेमचंद ने साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन नहीं माना, बल्कि उसे समाज में नैतिक चेतना और सामाजिक सुधार का माध्यम बनाया। ‘नमक का दरोगा’ कहानी में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक साहस का आदर्श वंशीधर के चरित्र के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जो रिश्वत और प्रलोभन के बावजूद अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते। ‘पंच परमेश्वर’ में न्याय, निष्पक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व का चित्रण किया गया है, जहाँ पंचायत के पद पर बैठकर व्यक्ति व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर उठकर सत्य और न्याय का पालन करता है। वहीं ‘ईदगाह’ कहानी में हामिद के माध्यम से त्याग, करुणा और मानवीय संवेदना का अत्यंत मार्मिक चित्रण मिलता है, जो यह दर्शाता है कि सच्ची मानवता दूसरों के दुःख को समझने और उनके लिए त्याग करने में निहित होती है। इन तीनों कहानियों के तुलनात्मक अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि प्रेमचंद ने जीवन के विभिन्न आयामों—प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक संबंधों और पारिवारिक जीवन—में नैतिक मूल्यों की स्थापना करने का प्रयास किया है। इस प्रकार प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज में नैतिक चेतना, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों के महत्व को रेखांकित करता है तथा यह दर्शाता है कि नैतिकता किसी भी स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है।

How to Cite This Article

सोनम सिंह, डॉ. जयसिंह यादव (2026). ‘नमक का दरोगा’, ‘पंच परमेश्वर’ और ‘ईदगाह’ में नैतिक आदर्शों का तुलनात्मक विश्लेषण . Journal of Frontiers in Multidisciplinary Research (JFMR), 7(1), 186-191. DOI: https://doi.org/10.54660/.JFMR.2026.7.1.186-191

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