अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरुद्ध अत्याचारों का विधिक विश्लेषण: बलौदा बाजार भाटापारा जिले के विशेष संदर्भ में
Abstract
इस शोध अध्ययन का उद्देश्य बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों के विरुद्ध होने वाले अत्याचारों की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण करना है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से यह स्पष्ट है कि इन समुदायों को सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक रूप से लंबे समय से वंचित रखा गया है। यद्यपि संविधान एवं विधिक प्रावधान जैसे कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) में विशेष सुरक्षा के प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन में कई स्तरों पर चुनौतियाँ परिलक्षित होती हैं । अध्ययन में प्राथमिक एवं द्वितीयक डाटा स्रोतों का उपयोग किया गया, जिसमें जिले से संबंधित अपराधों के आँकड़े, न्यायालयीन एवं प्रशासनिक रिपोर्टें तथा साक्षात्कार शामिल हैं। परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि जिले में अत्याचार के मामलों की संख्या समय-समय पर बढ़ती रही है, परंतु उनके प्रभावी निवारण में विधिक प्रक्रिया की धीमी गति, सामाजिक पूर्वाग्रह और पीड़ित वर्ग की असुरक्षा जैसी समस्याएँ प्रमुख अवरोधक हैं। चर्चा से यह निष्कर्ष निकला कि केवल विधिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी मानसिकता परिवर्तन, जागरूकता और प्रशासनिक तत्परता आवश्यक है। शोध सुझाव देता है कि पीड़ितों के लिए शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने हेतु विशेष न्यायालयों की कार्यक्षमता बढ़ाई जाए, पुलिस एवं प्रशासन को संवेदनशील बनाया जाए और समुदायों के बीच सामाजिक समरसता को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षा व जनजागरूकता कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया जाए।
How to Cite This Article
अनुराधा टंडन (2025). अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरुद्ध अत्याचारों का विधिक विश्लेषण: बलौदा बाजार भाटापारा जिले के विशेष संदर्भ में . Journal of Frontiers in Multidisciplinary Research (JFMR), 6(2), 259-263. DOI: https://doi.org/10.54660/.JFMR.2020.6.2.259-263